राँची विश्वविद्यालय के प्रबंधन अध्ययन संस्थान (IMS) में आयोजित हिन्दी दिवस समारोह एवं हिन्दी संगोष्ठी में सहभागी बनने का अवसर मिला। हिन्दी की प्रासंगिकता एवं वर्तमान समय में उसकी भूमिका पर आयोजित संगोष्ठी में मुख्य वक्ता (Keynote Speaker) के रूप में अपने विचार साझा किए।
अपने संबोधन में हिन्दी के समृद्ध साहित्यिक एवं सांस्कृतिक स्वरूप, बदलते वैश्विक परिदृश्य में हिन्दी की बढ़ती प्रासंगिकता तथा नई पीढ़ी के बीच हिन्दी के प्रति सम्मान और रचनात्मक जुड़ाव की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की।
मेरा मानना है कि हिन्दी का भविष्य केवल उसके बोलने वालों की संख्या में नहीं, बल्कि ज्ञान, शोध, साहित्य, तकनीक और वैश्विक संवाद की भाषा के रूप में उसके निरंतर विस्तार में निहित है। हिंदी हमारी आत्मा है और इसे संजोने का प्रयास हम सभी को करना चाहिए।
इस अवसर पर अपनी प्रकाशित पुस्तक ‘एक उड़ान’ में संकलित दो कविताओं का पाठ भी किया। विद्यार्थियों एवं उपस्थित शिक्षकों के बीच अपनी कविताएँ साझा करना मेरे लिए विशेष रूप से आत्मीय और आनंददायक अनुभव रहा।
हिन्दी दिवस हमें केवल एक दिन हिन्दी का उत्सव मनाने का अवसर नहीं देता, बल्कि यह संकल्प लेने की प्रेरणा देता है कि हम अपनी भाषा को जीवन, विचार, शिक्षा, साहित्य और कर्म के प्रत्येक क्षेत्र में सम्मान के साथ आगे बढ़ाएँ।